शब ए क़द्र क्या हैं और क्यों मनायी जाती हैं : Shab e Qadr Kya Hai

शब ए क़द्र क्या हैं और क्यों मनायी जाती हैं : Shab e Qadr Kya Hai

शब ए क़द्र क्या हैं और क्यों मनायी जाती हैं : Shab e Qadr Kya Hai – दोस्तों आज हम आपको इस लेख में शब ए क़द्र के बारे में जानकारी देंगे शब ए क़द्र क्यों मानते हैं और शब ए क़द्र में क्या पुण्य मिलता हैं और शब ए क़द्र का क्या महत्व हैं आपके इन सभी सवालो के जवाब इस लेख में हम आपको देंगे तो दोस्तों आप इस लेख को अंत तक ज़रूर पढ़े।

शब ए क़द्र क्या हैं और क्यों मनायी जाती हैं : Shab e Qadr Kya Hai
शब ए क़द्र क्या हैं और क्यों मनायी जाती हैं : Shab e Qadr Kya Hai

शब ए क़द्र क्या हैं : Shab e Qadr Kya Hai

शब ए क़द्र जिसे लैलतुल क़द्र के नाम से भी जाना जाता हैं , एक ऐसी रात को कहा जाता हैं जो रमजान के अंदर आती हैं और जिसके अंदर इबादत करने का सवाब बहुत ज़्यादा दिया जाता हैं और यह रमजान के आखरी के 10 दिनों में आती हैं इसकी कोई तारीख नहीं हैं बस यह कहा जाता हैं के शब ए क़द्र को आखरी के 10 दिनों में ढूंढो।

लेकिन इसमें एक बात यह भी बताई जाती हैं के वह रमजान के आखरी 10 रातो की 21, 23, 25, 27, 29 वी रात मे से किसी एक में हो सकती हैं। इसलिए मुस्लमान 21, 23, 25, 27 और 29 वी रात को जागते और अल्लाह की इबादत करते है।

इस्लाम हमें गहन आध्यात्मिक अनुभव करने का अवसर देता है, और ऐसे अनुभव जिन्हें (सांसारिक अस्तित्व) के साथ-साथ इसके लुभाव को दूर करने की आवश्यकता होती है। सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक रमजान की धन्य रातें हैं। पैगंबर मुहम्मद ने घोषणा की, “जो कोई भी रमजान की रातों को विश्वास से और इनाम की उम्मीद में प्रार्थना में बिताता है, उसे उसके पिछले पापों को माफ कर दिया जाएगा।”

इन अवसरों में सबसे महत्वपूर्ण रमजान के आखिरी दस दिन हैं। जैसा कि पैगंबर की पत्नी आइशा ने कहा, “जब आखिरी दस रातें शुरू हुईं, तो अल्लाह के रसूल रात में जागने लग जाते थे और अपने परिवार को भी जगाया करते थे , और नमाज़े पढ़ा करते थे। और रमजान के आखरी की 10 रातो को एहतेकाफ भी करते थे मस्जिद के अंदर।

शब ए क़द्र की दुआ : Shab e qadr ki dua
शब ए क़द्र की दुआ : Shab e qadr ki dua

शब ए क़द्र का महत्व : Shab e Qadr Ka Mehatva

हालाँकि, कोई रात या दिन नहीं है जिस पर लालत अल-क़द्र (फ़रमान की रात) के नाम से संदर्भित रात की तुलना में अधिक प्रमुखता से ज़ोर दिया गया है। कुरान का अध्याय 97 पूरी तरह से रात को समर्पित है:

.اِنَّآ اَنْزَلْنٰهُ فِيْ لَيْلَةِ الْقَدْرِ | وَمَآ اَدْرٰىكَ مَا لَيْلَةُ الْقَدْرِ | لَيْلَةُ الْقَدْرِ ڏ خَيْرٌ مِّنْ اَلْفِ شَهْرٍ | تَنَزَّلُ الْمَلٰۗىِٕكَةُ وَالرُّوْحُ فِيْهَا بِاِذْنِ رَبِّهِمْ ۚ مِنْ كُلِّ اَمْرٍ | سَلٰمٌ ڕهِيَ حَتّٰى مَطْلَعِ الْفَجْرِ

हमने इस (क़ुरआन) को शबे-क़द्र में नाज़िल किया है। और तुम क्या जानो कि शबे-क़द्र क्या है?शबे-क़द्र हज़ार महीनों से ज़्यादा बेहतर है।फ़रिश्ते और रूह उसमें अपने रब के इज़्न से हर हुक़्म लेकर उतरते है।वो रात सरासर सलामती है, तुलुए-फ़ज्र तक।

शब ए क़द्र क्यों मनायी जाती हैं : Shab e Qadr Kyu Manayi Jati Hai

यह वह रात है जो रमज़ान के दौरान लैलतुल क़द्र (शक्ति की रात के रूप में भी जाना जाता है) को चिह्नित करती है) बहुत महत्वपूर्ण है। पवित्र कुरान इस रात के दौरान नीचे भेजा गया था। रात के दौरान फ़रिश्ते उतरते हैं। इस रात में अल्लाह की इबादत करने का सवाब 1000 रातो में इबादत करने से भी ज़्यादा हैं । रात के दौरान आप जो भी अच्छा काम करते हैं, वह ऐसा 1000 साल या 83 साल की अवधि के लिए करने जैसा है! प्रामाणिक हदीसों में कहा गया है कि लैलात-अल-क़द्र रमज़ान के आखिरी 10 वें दिन में होता है। । विद्वानों की एक आम सहमति है कि यह आमतौर पर रमजान की 25वीं, 27, या 29वीं रात को होती है।

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शब ए क़द्र की दुआ : Shab e Qadr Ki Dua

शब ए क़द्र की दुआ : Shab e qadr ki dua

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عُفُوٌّ كَرِيمٌ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي
Allahumma innaka ‘afuwwun, tuhibbul-‘afwa, fa’ fu ‘anni
या अल्लाह आप सबसे ज़्यादा माफ़ करने वाले हैं। और आप माफ़ी को पसंद करते हैं। तो मुझे भी मॉफ कर दो।

शब ए क़द्र में क्या करे : Shab e Qadr Me Kya Kare

मस्जिद में एतिकाफ
तहज्जुद की नमाज़ अदा करें
कुरान की तिलावत करो
पैगंबर द्वारा सुझाई गई विशेष दुआ

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