Shani Chalisa | शनि चालीसा का पाठ एवं इसके लाभ

दोस्तों आप सभी का हमारे blog पर स्वागत है। दोस्तों आज के इस article से माध्यम से हम आपको हम आपको Shani Chalisa के बारे में जानकारी देंगे। दोस्तों मेरे हिसाब से आप सभी शनि महाराज के बारे में तो जानते ही होंगे। दोस्तों आप सब तो जानते ही है शनि महाराज की कृपा होना हमारे लिए कितना जरुरी है। 

अगर आप आपको शनि देव को खुश करना है तो शनि चालीसा का पाठ करना आरम्भ कर देना चाहिए। दोस्तों मैं बहुत से लोगों को देखता हूँ की वे केवल शनि महाराज की आरती का पाठ करते है। परन्तु अगर आपको शनि महाराज को खुश करना है तो आपको शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए। 

दोस्तों मैं आप सभी की समस्याओं को समझता हु इसलिए आज के इस article में आप सभी के लिए shani chalisa का lyrics के साथ साथ इससे होने वाले लाभों ले बारे में भी आप सभी को बताएंगे। दोस्तों मेरा आप सभी से बस यही निवेदन है की आप सभी की इस आरती को पूरा पढ़ें एवं इसे अपने दोस्तों के साथ अवस्य share करे। 

श्री शनि चालीसा का पाठ 

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुख दूर करि,
कीजै नाथ निहाल॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु,
सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय,
राखहु जन की लाज॥
जयति जयति शनिदेव दयाला।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।
माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥
परम विशाल मनोहर भाला।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।
हिय माल मुक्तन मणि दमके॥1॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
पल बिच करें अरिहिं संहारा॥
पिंगल, कृष्ो, छाया नन्दन।
यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन।
सौरी, मन्द, शनी, दश नामा।
भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
जा पर प्रभु प्रसन्न हैं जाहीं।
रंकहुँ राव करें क्षण माहीं।।2।।
पर्वतहू तृण होई निहारत।
तृणहू को पर्वत करि डारत॥
राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।
कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
बनहूँ में मृग कपट दिखाई।
मातु जानकी गई चुराई॥
लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।
मचिगा दल में हाहाकारा॥3॥
रावण की गतिमति बौराई।
रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
दियो कीट करि कंचन लंका।
बजि बजरंग बीर की डंका॥
नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।
चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
हार नौलखा लाग्यो चोरी।
हाथ पैर डरवाय तोरी॥4॥
भारी दशा निकृष्ट दिखायो।
तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
विनय राग दीपक महं कीन्हयों।
तब प्रसन्न प्रभु कै सुख दीन्हयों॥
हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।
आपहुं भरे डोम घर पानी॥
तैसे नल पर दशा सिरानी।
भुंजीमीन कूद गई पानी॥5॥
श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।
पारवती को सती कराई।
तनिक विलोकत ही करि रीसा।
नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी
बची द्रौपदी होति उघारी॥
कौरव के भी गति मति मारयो।
युद्ध महाभारत करि डारयो॥6॥
रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला।
लेकर कूदि परयो पाताला॥
शेष देवलखि विनती लाई।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
वाहन प्रभु के सात सजाना।
जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
जम्बुक सिंह आदि नख धारी।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥7॥
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवै।
हय ते सुख सम्पति उपजावै॥
गर्दभ हानि करै बहु काजा।
सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।
चोरी आदि होय डर भारी॥8॥
तैसहि चारि चरण यह नामा।
स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥
लौह चरण पर जब प्रभु आवै।
धन जन सम्पत्ति नष्ट करावें॥
समता ताम्र रजत शुभकारी।
स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥
जो यह शनि चरित्र नित गावै।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥9॥

अद्भुत नाथ दिखावै लीला।
करें
शत्रु
के नशि बलि ढीला॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।
विधिवत शनि ग्रह शांति कराई।
पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।
दीप दान दै बहु सुख पावत॥
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥10॥
॥दोहा॥
पाठ शनिश्चर देव को, की हों भक्त तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

Shani Chalisa के पाठ से होने वाले लाभ 

दोस्तों वैसे तो शनि चालीसा के पाठ से अनेको लाभ होते है लेकिन आज के इस article के माध्यम से मैं आपको इससे होने वाले सबसे महत्वपूर्ण फायदों ले बारे में बताऊंगा। इन लाभों को बताने का मकसद केवल इतना है की आप इस चालीसा का पाठ करने के लिए प्रेरित हो सके।

  • शनि देव को खुश करने के लिए शनि चालीसा का पाठ किया जाता है।
  • इसके पाठ से शनि महाराज की कृपा आप पर बनी रहती है।
  • शनि महाराज हमेशा आपकी रक्षा करते है।
  • आपकी सारी परेशानियां धीरे धीरे दूर होने लगती है।
  • इसके पाठ से आपके साथ होने वाली अनहोनी टल सकती है।
  • शनि देव आपको हमेशा सचाई एवं अच्छाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते है।
  • शनि देव अपने भक्तों से बहुत प्रेम करते है और उनपर कोई विपदा नहीं आने देते।
  • आप Shani Chalisa के साथ साथ शनि देव की आरती का पाठ भी अवस्य करे।

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शनि चालीसा का पाठ कैसे करे 

दोस्तों ऐसे तो आप शनि चालीसा का पाठ कभी भी कर सकते है लेकिन शनिवार और मंगलवार की शाम 5 बजे शनि मंदिर में हनुमान जी के मंदिर के पास को पीपल का पेड़ होता है उसकी छाया में करना और शुभ माना जाता है। अगर संभव हो तो वहा पर आप एक सरसो का दिया जला ले।

दोस्तों आप चाहे तो आप एक नियम बना सकते है की आप हर शनिवार या मंगलवार को इस चालीसा का पाठ करेंगे। आप शनि चालीसा के साथ साथ,हनुमान चालीसा का भी पाठ जिससे की प्रभाव दुगना हो जाये। दोस्तों आपको शनि देव की मूर्ति अपने घर में स्थापित नहीं करनी चाहिए , आप इसका पाठ पास के मंदिर में कर सकते है।

दोस्तों मुझे पूरी आशा है की आप सभी को हमारा यह article जो की Shani Chalisa lyrics के ऊपर लिखा गया है पसंद आया होगा। अगर आप सभी लोगों को सचमुच हमारा यह article पसंद आया है तो आप हमारी मदद करने के लिए इसे share जरूर करे। 

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Yadav

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